1. यह साबित करता है कि आरोपियों के खिलाफ ₹20,50,000 की ठगी का मामला पुलिस रिकॉर्ड में पूरी तरह दर्ज है और यह कोई सामान्य सिविल विवाद नहीं बल्कि सुनियोजित आपराधिक साज़िश है।
2. यह ऑन-रिकॉर्ड साबित करता है कि पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों ने तफ्तीश को भटकाने और सहयोग न करने का रवैया अपनाया, जिसके कारण कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका (BA/1459/2025) को सीधे खारिज कर दिया।
अदालत में माना कि पैसे और मोबाइल बरामद करना बाकी है: 17 नवंबर 2025 को डिटेक्टिव स्टाफ के ए.एस.आई. राजेश कुमार ने कोर्ट में लिखित जवाब दाखिल करते हुए साफ माना कि शिकायतकर्ता दीपक सैनी के ₹20,50,000 बकाया हैं और यह ठगी की राशि तथा मोबाइल फोन आरोपी करण मित्तल व अन्य सह-आरोपियों से बरामद (Recovery) करना अभी बाकी है।
असहयोग की ऑन-रिकॉर्ड पुष्टि: पुलिस ने खुद लिखित में स्वीकारा कि 15.11.2025 को जब आरोपी करण मित्तल को पूछताछ में शामिल किया गया, तो वह जांच अधिकारी के सामने अपनी बातों को लगातार घुमाता रहा और उसने तफ्तीश में किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं किया।
मुख्य प्रार्थी: दीपक सैनी व पार्टनर्स
पता: सफीदों गेट, जींद, हरियाणा
मोबाइल: +91-7404791200
ईमेल: (deepaksaini725@gmail.com)
मुकदमा: FIR संख्या 0428/2024
थाना: थाना शहर जींद, हरियाणा
वर्तमान जांच एजेंसी: सीआईए (CIA Staff), जींद
धाराएं: 406, 420, 506, 34 IPC
अस्वीकरण: इस वेबसाइट पर उपलब्ध सभी विवरण, समयरेखा (Timeline) और दस्तावेज़ पूरी तरह से माननीय न्यायालय, पुलिस रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की सत्याप्ति प्रतियों (Certified Copies) पर आधारित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और सहयोग सुनिश्चित करना है।
वर्तमान में तीनों आरोपियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया सीआईए (CIA) स्टाफ जींद के पास री-इन्वेस्टिगेशन और ठगी गई राशि ₹20,50,000 की रिकवरी हेतु सक्रिय है।